मुद्दते हो गयी जिन्हें रोके हुए
बहने दो कुछ ख्वाब अब पिघले हुए
ऐ कलम तू अकेली है कहाँ
शब्द -शब्द जुड़ के देख काफिले हुए
कैद कर सकता है उनको कौन
जिन परिंदों के परों में हौसले हुए
बहने दो कुछ ख्वाब अब पिघले हुए
ऐ कलम तू अकेली है कहाँ
शब्द -शब्द जुड़ के देख काफिले हुए
कैद कर सकता है उनको कौन
जिन परिंदों के परों में हौसले हुए
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